Bihar Bhakti Andolan

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Bihar Bhakti Andolan with the victims of Koshi Disaster in 2008

बिहार-भक्ति क्या है ?

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Tuesday, April 6, 2010

ये पाखंडी जनता के दुश्मन हैं

माओवाद के नाम पर अब तक का सबसे बड़ा पाखण्ड, भारत मे सक्रिय सबसे बड़े अपराधी-गिरोह ने आज दंतेवाडा मे किया है.खुद को माओवादी , नक्सलवादी लेनिनवादी कहने वाले इन पाखंडियों से मैंने अक्सर अपनी फील्ड पोस्टिंग के समय दास कैपिटल की शास्त्रीय भाषा मे शास्त्रार्थ किया है और कुछ प्रश्न पूछे हैं जो आज इस ब्लॉग के माध्यम से फिर पूछ रहा हूँ ..
                  ये प्रश्न इनके पापों का औचित्य बताने वाली श्रीमती अरुंधती राय और उन जैसे लोगो से भी पूछे जा रहे हैं जो सर्वहारा के इन सबसे बड़े और खतरनाक ऐतिहासिक दुश्मनों के भय से इनका बौद्धिक समर्थन करते हैं --

१.क्या १९४९ मे चीनी सेना के सहयोग से हुई माओवादी सशस्त्र क्रान्ति के बाद , दुनिया के किसी बड़े देश मे  सशस्त्र क्रान्ति हुई है ?? यदि नहीं तो फिर यह असंभव  स्वप्न दिखाकर सर्वहारा का बौद्धिक शोषण क्यों??

२.क्या आज के प्रबल वैज्ञानिक युग मे विश्व के राष्ट्रों के पास जो शस्त्र ( परमाणु बम जैसे महाविनाशकारी शस्त्र ) उपलब्ध है वैसे शस्त्र इन कथित माओवादियों के पास कभी भी हो सकते हैं ??
३.यदि नहीं तो क्या इस युग मे सशस्त्र क्रान्ति का स्वप्न दिखाकर युवाओं को एक मिथ्या और कभी न घटित हो सकने वाले सिद्धांत का अनुयायी बनाकर उनकी नियति  के रूप मे उनका विनाश लिख देना मार्क्सवाद, लेनिनवाद , माओवाद, की ह्त्या नहीं है ??
४.जिस क्षेत्र मे नक्सलवादी अपनी ताकत के साथ अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहे है क्या उस क्षेत्र मे वे सर्वहारा  के लिए चलाई जा रही विकास योजनाओं से ३०% या उससे भी अधिक लेवी नहीं ले रहे ?? यदि ले रहे तो क्या यह उसी सर्वहारा का शोषण और उनका  मांस भक्षण नहीं  जिस सर्वहारा की मुक्ति की बात वे सशस्त्र क्रान्ति के द्वारा करने का झूठा वादा और दावा  कर रहे.??
                ये प्रश्न और इनके उत्तर के रूप मे  प्रश्नित-समूह का शाश्वत मौन यह  बताता है कि इस देश मे मानसिक रूप से असंतुलित और विकृत लोगो का एक ताकतवर समूह इक्कीसवीं शताब्दी को समय-पूर्व ही पीछे छोड़ देने की ताकत रखने वाले भारत को, उस प्रस्तरयुगीन कालखंड मे ले जाना चाहता है जब जंगल का क़ानून मानवता के बौद्धिक सौन्दर्य को विकसित  ही नहीं होने दे रहा था..
             हमारे देश की संवैधानिक-व्यवस्था, जिन एजेंसियों के माध्यम से देश के समस्त नागरिको को आर्थिक न्याय दिलाना चाहती है वह भ्रष्ट हो चुकी है - यह सत्य है ..
              यह सत्य है कि जिस पूर्व मध्यप्रदेश के दंतेवाडा मे इन पाखंडियो ने नरसंहार किया है उसी प्रदेश के एक आई ए एस अधिकारी और उसकी अधिकारी पत्नी के पास से कुछ ही दिन पूर्व आम जनता से लूटे हुए  करोडो रुपये बरामद किये गए ..
यह सत्य है कि पूरे देश मे सरकारी अधिकारी जनता के पैसो की लूट के आरोपित हो रहे हैं ..
                  तो क्या इसका समाधान वही है जो दंतेवाडा मे या और जगहों पर इस अपराधी गिरोह द्वारा किया जा रहा है ..और क्या गारंटी है कि इन पाखंडियो के शाशन मे इनके अधिकारी भ्रष्टाचार नहीं करेगे ..
          क्या अरुंधती राय या अन्य कोई भी माओवादी नेता यह बतायेगे कि नक्सलवादियो ने  पिछले पांच वर्षों मे कितनी लेवी वसूली और उसका  खर्च कैसे किया  ??
           क्या ये लोग अपने प्रभाव क्षेत्र के लोगो को अपनी आडिट रिपोर्ट देते हैं ? यदि ऐसा नहीं है तो ये लोग उन जंगली आदमखोर जानवरों से भी खतरनाक है जो अपने ही समूह के सदस्यों का मांस खाकर तृप्त होते  है क्योकि ये मानवभक्षण का पाप जान बूझ कर कर रहे हैं .
   यदि क्रान्ति करना है तो इस देश के नौजवानों को संगठित और शिक्षित करके उन्हें आई ए एस , आई पी एस जैसे महत्वपूर्ण सरकारी पदों पर बैठकर ईमानदारी से आम जनता की सेवा करने का प्रशिक्षण दो ..
            इन ताकतवर सेवाओं मे रह कर रिश्वत न लेकर दिखाओ तब  क्रान्ति जैसे पवित्र शब्द का उच्चारण करो ..
              मैंने पलामू, चतरा , गया  जैसे नक्सलवाद प्रभावित जिलों के एस पी और डी आई जी के रूप मे इन पाखंडी माओवादियों के मिथ्याचार का पर्दाफ़ाश किया था और अब भी कर रहा हूँ.. मैंने पैम्फलेट प्रकाशित कराकर इन्हें बौद्धिक और व्यवहारिक स्तर पर कमज़ोर, पाखंडी और मिथ्याचारी साबित किया था..वह पैफ्लेट आप भी देखें..


मानवीय सभ्यता के ऊपर नक्सलवाद से बड़ा खतरा कभी नहीं पैदा हुआ  क्योकि यह अतीत के सभी खतरों से अधिक पाखण्ड पूर्ण है..

--- अरविंद पाण्डेय 
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